Desh Jhukhva Du Nahi - Anupriya Lakhawat Lyrics

Desh Jhukhva Du Nahi - Anupriya Lakhawat Lyrics

Desh Jhukhva Du Nahi गीत एक माँ और सरहद पर जाने वाले वीर पुत्र (माँ भारती के लाल) की मर्मस्पर्शी और अनकहे शब्दों में छुपी हुई भावनाओं को व्यक्त करता है। कैसे एक माँ अपने कलेजे के टुकड़े को उसकी दूसरी माँ उसकी जन्मभूमि की रक्षा हेतु अपने से दूर होने देती है। बेटा कितना ही बड़ा क्यों न हो जाये लेकिन माँ के नजरिये में वो हमेशा एक अबोध बालक ही रहता है। इस भूमि ने महाराणा जैसे अनेको यशश्वी योद्धा पैदा किये है, जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण हँसते हँसते त्याग दिए तो एक पन्ना जैसी माँ कैसे पीछे रह सकती हैं मातृभूमि के गौरव के लिए।

Desh Jhukhva Du Nahi - Anupriya Lakhawat Lyrics
Singer Anupriya Lakhawat
Music Mahesh Vyas
Song Writer Prahlad Singh Kavia

Desh Jhukhva Du Nahi in Hindi

मात (हार/पराजय) सु मरणों भलो, बलिदान रुकवा दूं नहीं,
शीश हंस कर वार दूं , पर देश झुकवा दूं नहीं।
सागरां जल सु भी ज़्यादा, इण वतन सुं प्रीत है,
सिर कटे और धड़ लड़े, पुरखा निभाई रीत हैं।
अश्व संग असवार काटे, जद लड़े जोद्धा अठे,
हिन्द पर निजरा उठे, तो जीवता छोडु नहीं।
मात सु मरणों भलो, बलिदान रुकवा दूं नहीं।।

धन्य है पन्ना सी माएँ, पीड़ सु पिघली नहीं,
माईं ने निज़ पूत देता, आह् तक निकली नहीं।
भेजता मां लाडलो, क्यू आँख थारी नम हुई,
आज हंस दे वो विदाई, दूध लजवा दूं नहीं।
मात सु मरणों भलो, बलिदान रुकवा दूं नहीं।।

झुंझ जे वनराज सो तू, लाड़ला रण खेत में,
एक भी बेरी न बख्शी, मौत देजे भेंट में।
खून कोटि को लगाजे, भारती रै भाल पे,
युद्ध की भूमि में करजे, प्राण री परवाह नहीं।
मात सु मरणों भलो, बलिदान रुकवा दूं नहीं,
शीश हंस कर वार दूं , पर देश झुकवा दूं नहीं।
मात सु मरणों भलो, बलिदान रुकवा दूं नहीं ||

Desh Jhukhva Du Nahi in English

maat (haar / paraajay) su maranon bhalo, balidaan rukava doon nahin,
Sheesh hans kar vaar doon, par desh jhukava doon nahin.
saagaran jal su bhee ziyada, in vatan sun preet hai,
Sir kate aur dhad lade, purakha nibhaee reet hain.
ashv sang asavaar kaate, jad lade joddha athe,
Hind par nijara uthe, to jeevata chhodu nahin.
maat su maranon bhalo, balidaan rukava doon nahin ..

dhany hai Panna see maen, peed su pighalee nahin,
I don't even know what to do.
Send it to me, why not?
Aaj hans de vo vidaee, doodh lajava doon nahin.
maat su maranon bhalo, balidaan rukava doon nahin ..

jhunjh je vanaraaj so too, laadala ran khet mein,
A bhee beree na bakhshee, maut deje bhent mein.
khoon koti ko lagaaje, bhaaratee rai bhaal pe,
The war in Bhoomi is not over.
maat su maranon bhalo, balidaan rukava doon nahin,
Sheesh hans kar vaar doon, par desh jhukava doon nahin.
maat su maranon bhalo, balidaan rukava doon nahin ||

धिन मावां हिंदवाण री, हरै धरा रो हाण |
वारै खुद रा लाडला, दीपै हिंदुस्तान ||

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